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महाविद्यालय कुलगीत

ये सरस्वती का मन्दिर है,
ये ज्ञान-साधना का मन्दिर।
ये तपोभूमि मानवता की,
विज्ञान साधना का मन्दिर।।
ये ज्ञान साधना का मन्दिर, विज्ञान साधना का मन्दिर।

अभिताभ शाक्य मुनि के चरणों, को परस हुयी भी जो पावन,
श्रावस्ती की गौरव गाथा, से गुंजित है जिसका कण-कण,

उस पुण्य भूमि पर है निर्मित, ये धर्म चेतना का मन्दिर।
ये ज्ञान-साधना का मन्दिर, विज्ञान साधना का मन्दिर।।

सरयू अचिरावति की धारा, सिंचित करती जिसका अंचल,
चरणों पर अध्र्य-चढ़ाने को, हिमवान भेजता है बादल,

देवी पाटन की करूणामय, ये प्राण साधना का मन्दिर।
ये ज्ञान-साधना का मन्दिर, विज्ञान साधना का मन्दिर।।
जिस कुल में थे दिग्विजय सिंह, से यशःकाय कवि भूप विजय,
योद्धा महान नव नीति कुशल, कवियों, विद्वानों के आश्रय,
उस कुल की कीर्ति पताका यह, सम्मान साधना का मन्दिर।
ये ज्ञान-साधना का मन्दिर, विज्ञान साधना का मन्दिर।।

थे पाटेश्वरी प्रसाद सिंह, अति देश भक्त त्यागी निर्भय,
विद्यालय और चिकित्सालय, देते जिनके यश का परिचय,

उज्ज्वल गाथा गाता जिनकी, ये दान साधना का मन्दिर।
ये ज्ञान-साधना का मन्दिर, विज्ञान साधना का मन्दिर।।
यह लाल कुँवरि की कीर्ति ध्वजा, का स्तम्भ महाविद्यालय है,
हैं पाटेश्वरी अमर जिसको, निर्मित कर, यह देवालय है,

यह सरस्वती के पुत्रों की, निर्माण साधना का मन्दिर।
ये ज्ञान-साधना का मन्दिर, विज्ञान साधना का मन्दिर।।

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